Five Human Rights Defenders ( including three women ) of Dalit Foundation ( India) arrested and remanded to judicial custody on false charges on India's 64th Independence Day ( 15th August 2010 ) Henri Tiphagne, Executive Director of People's Watch has also been identified as an 'absconding accused' by the police in the same criminal case.
जहाँ हो दलित अत्याचार करें सिर्फ एक पुकार राष्ट्रीय दलित युवा मोर्चा
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Saturday, August 21, 2010
Thursday, August 19, 2010
छत्तीसगढ़ --: रायपुर जिले के पलारी क्षेत्र में दलितों और गैर दलितों के बीच खुनी संघर्ष
पलारी -| ब्लाक के ग्राम बलोदी में 65 एकड़ जमीन पर दलित समुदाय के लोग पिछले २० , २५ वर्षों से खेती करते आ रहे हैं बस यहीं जमीन वहां रह रहे गैर दलितों की आखों की किरकिरी बनी थी
गैर दलित पिछले कई वर्षों से दलितों को किसी न किसी बहाने से प्रताड़ित करते चले आ रहे थे , ग्राम बलोदी में 40% आबादी दलितों की हैं 60% आबादी गैरदलितों की हैं,,
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| अपने जानवरों को दलितों के खेतों में चराता एक गैर दलित |
मुख्य घटना ---: 16 अगस्त को गैरदलितों द्वारा गाँव में एक मीटिंग का आयोजन किया गया जिसमे दलितों को उनकी जमीन से बलपूर्वक बेदखल करने का फैसला किया गया ,दुसरे दिन 17 अगस्त को सारे गैर दलित 300 से 400 की जनसँख्या में अपने सारे जानवरों को लेकर दलितों के खेतों को चराने के लिए गए .तथा अपने जानवरों को उनके खेतों में उनकी फसल को चरने छोड़ दिया . कुछ समय बाद जब दलित बस्ती में इस बात की खबर पहुंची . तो दलितों ने वहां जाकर विरोध जताया . बातचीत के दौरान गैरदलितों के गुट ने उन पर अचानक हमला बोल दिया . और दोनों समुदायों के बीच खुनी संघर्ष चालू हो गया जिसमे दोनों समुदायों के बहुत लोग घायल हो गए . दो गैर दलितों की मौत हो गयी .पुलिस घटना के बहुत देर बाद वहां पहुंची . पुलिस ने 24 दलितों को गिरफ्तार किया ..
घटना के पूर्व गाँव की पृष्ठ भूमि -: गाँव की लगभग आबादी 3500 हैं जिसमे दलितों की जनसंख्या 45% तथा गैरदलितों की जसंख्या 55% हैं , विवेचना के दौरा ऐसी कई बातें सामने आयी जों यह बताती हैं की इस गाँव में घोर छुआ-छूत हैं , गैर दलित हमेशा से दलितों को किसी न बहाने प्रताड़ित करते आ रहे थे .
रमेश घृतलहरे के अनुसार --: लगभग ४० से ४५ वर्ष पूर्व एक पुराने मालगुजार जुदावर मल्दागा ( बनिया )से दाऊ सिदार कश्यप ने इस गाँव को ख़रीदा. बेचते समय बनिया ने दाऊ से कहा था की केवल जितनी जमीन मैं मेरा हाल चलता हैं उतनी ही भोमी में हाल चलाना ,बाकि जमीन को घस्भूमि के लिए रखना . कुछ समय बाद एक साजिश के तहत गाँव के गैरदलितों ने उक्त बनिया मारपीट कर गाँव से भगा दिया ,उस समय गाँव में लगभग 350 एकड़ खली जमीन थी , धीरे-धीरे गाँव के गैर दलितों ने उक्त खली जमीन को अपने कब्जे में ले लिया , कुछ लोंगों ने पटवारी के साथ मिलकर बहुत सी जमीनों को अपने नाम करा लिया , जों जमीन खली बची उसमे से कुछ एकड़ पर दलितों ने खेती करना चालू कर दिया.
इस घटना के पूर्व की घटनाये --: सन 80 में जब पंचायत चुनाव हुआ तो गाँव के दाऊ भगवतदास कश्यप चुनाव हर गया और दलित कल्याणदास घृतलहरे चुनाव जीत गए , तब भी जातिगत झगडा हुआ था .
२-: 1993 में गौरी-गौर ( छत्तीसगढ़ का एक धार्मिक त्यौहार ) के समय कुछ गैरदलित युवकों ने गों में जातिगत गलियां देते हुए एक दलित टेलर रमेश भारती को मारा और उसकी दुकान में आग लगा दी थी .
३-: एक होलिका दहन के समय गैर दलितों उत्पात मचाते हुए कुछ दलितों के घर में आग ली दी थी .
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| दलितों के खेतों की मेड बैठे गैर दलित |
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| दलितों के खेतो की फसल पुलिस ने की |
यह तशवीरें पूरी घटना खुद व्यान करती हैं ..इन सारे लोंगो से जब हमने पूंछा की क्या हुआ तो इनका कहना था इस गाँव के दलितों हम लोंगो से कुछ ज्यादा ऊँची आवाज में बात करने लगे थे अगर इस गाँव रहना हैं जमीन छोडनी पड़ेगी -----
पलारी गाँव के तहशिलदार के अनुसार -: गाँव में जातिगत तनाव काफी समय से हैं यहाँ के दलित भूमिहीन हैं . गैर काफी सम्रद्ध हैं , गैरदलितों ने भी लगभग 250-300 एकड़ पर कब्ज़ा कर रखा हैं , हमारे उपर काफी दवाब हैं , शासन सीमांकन करके उक्त जमीन को कब्ज़ा मुक्त कराएगा ..
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| गाँव मौजूद तहसीलदा& राजस्व इंस्पेक्टर |
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| गाँव में मौजूद पुलिस इंस्पेक्टर& विजय राज(NDYF) |
थाना पलारी के पुलिस इंस्पेक्टर ने गिरफ्तार व्योक्तीयों का निन्मलिखित व्योरा दिया
दलितों के उपर की गया F.I.R,,
- अपराध क्र..254/10............. धाराएँ 147,148,149,294,323,506(B) , 307,ipc 302 ipc
- प्रार्थी ---------------- कालीचरण पिता मुखीराम देवांगन उम्र ३० वर्ष ग्राम बलोदी
- आरोपी ------- १ मंगलदास सतनामी २ भद्दर सतनामी ३.छोटेलाल सतनामी ४, बिलवा ५.बग्गू सतनामी ६,गिरधारी सतनामी ७, खेदु सतनामी ८,जीवन सतनामी ९,इंदु १०, ज्ञानदास सतनामी ११,मनोहर सतनामी + 30-40 ग्रामवासी बलोदी
- जब्त किये गए हथियार ---------- सिर्फ 8-10 लाठियां
गैरदलितों के उपर किया गया FIR...
- अपराध क्र. 255/10 ------------------- धाराएँ .. 147,148,149,294,506(B) 323 ipc(कोई बड़ी धाराएँ नही , कोई sc/st act नही लगाया गया )
- प्रार्थी ------ मगलदास पिता भोजराम सतनामी उम्र 65 वर्ष ग्राम बलोदी थाना पलारी
- आरोपी ...... १, राजेंद्र २,जनक ३,पुनीत ४, सुरेन्द्र ५,मनीराम ६,कालीचरण ७, पंचराम ८,तुलसीराम ९.बदन १०,बेशाखुराम ११,खिलावन १२. तिलक १३,हरवंश १४,गोपाल १५,मनहरण १६, साधराम १७, मूतु १८, परस १९,महासिंह २०, नत्थू २१,मनोहर यादव २२,भवानी २३,चोवा २४,भीम सिंह + 25-30 व्यक्ति सभी ग्राम बलोदी थाना पलारी
जिन व्योंक्तियों के नाम दिए गए हैन वो सभी गिरफ्तार हो चुके हैं ...... पुलिस इन्स्पेक्टर थाना पलारी
जय-भीम
यह सारे घर वहां रहने वाले दलितों के हैं जों की भूमिहीन है और इन्हें उक्त जमीन का पट्टा २००२ में तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री अजित जोगी द्वारा हरेली-सहेली योजना के तहत प्रदान किया गया था

Monday, July 26, 2010
राष्ट्रीय दलित युवा मोर्चा द्वारा रायपुर कलेक्टर का घेराव
14 जुलाई २०१० को ग्राम तर्री (राजिम)विकासखंड अभनपुर . पंचायत में रोजगार गारंटी योजना में धांधली तथा दलितों को रोजगार नही मिलने की शिकायत को लेकर रायपुर कलेक्टर का घेराव किया गया .
ग्राम पंचायत तर्री में अभी तक पूर्ण रोजगार गारंटी योजना लागु नही हैं,यहाँ लोंगों को बमुश्किल १०० दिनों के कम में केवल १५ या २० दिन कम मिलता हैं . ग्राम सचिव द्वारा विशेषकर दलित वर्ग के लोंगों को जॉब कार्ड नही दिया गया .राष्ट्रीय दलित युवा मोर्चा द्वारा इस ग्राम पंचाट में कार्य शुरू करने पर इस घटना का पर्दाफाश हुआ.
Thursday, June 3, 2010
दलित युवक पुलिस की हिरासत में
मध्य प्रदेश में पुलिस किस तरह अपनी वर्दी पर दाग लगा रही है, इसका एक उदाहरण मुरैना के सिविल लाइंस थाने में दिखा, जहां पुलिस ने एक दलित युवक को पिछले चार दिनों से बंधक बनाकर रखा है।
बताया जा रहा है कि पुलिस उसे जाति सूचक गालियां दे रही है और उसके साथ मारपीट भी कर रही है। इतना ही नहीं पुलिस ने उसे छोड़ने के लिए 10 हजार रुपए की मांग की है।
इस सबके बाद जब दलित युवक के परिजनों ने कोर्ट में आवेदन किया तो पुलिस ने कोर्ट को किसी तरह की जानकारी नहीं दी और कोर्ट को बता दिया कि युवक को गिरफ्तार नहीं किया गया है और ना ही वह किसी मामले में वांटेड है।
दलित युवक के परिजन अब एसपी के दफ्तर में इंसाफ की गुहार लगा रहे हैं |
दलित युवक की हत्या
रायसेन। जिले के थाना सुल्तानगंज के तहत ग्राम बम्होरी सूबेदार में खेत की मेड़बंदी के लिए पत्थर जमाने से मना करने को लेकर पैंतालीस वर्षीय दलित हरकिशन का पड़ोसी किसान कल्याण चिड़ार से कहासुनी हो गई। इसके बाद कल्याण सिंह सहित अन्य तीन लोगों ने एक राय होकर लाठियों से उसकी बेरहमी से पिटाई कर दी। बाद में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर उनकी सरगर्मी से तलाश शुरू कर दी है।
थाना प्रभारी एसके दुबे ने बताया कि ग्राम बम्होरी सूबेदार में दलित किसान हरकिशन उम्र 45 वर्ष अपने खेत की पत्थरों को जमा कर मेड़बंदी कर रहा था।तब इस मामले का कल्याण सिंह चिड़ार ने विरोध किया तो दोनों के बीच झूमा-झटकी हो गई।
बाद में कल्याणसिंह, रम्मू, गनपत और अमानसिंह चिड़ार ने लाठियों से पीट-पीटकर गंभीर रूप से घायल कर दिया। मारपीट के दौरान उसकी छाती और सिर में चोटें लगीं। इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। मृतक की पत्नी कमलाबाई की रिपोर्ट पर पहले पुलिस ने जानलेवा हमले का प्रकरण दर्जकर लिया था। बाद में सुल्तानगंज पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कर लिया हैं |
Saturday, May 22, 2010
Friday, April 16, 2010
Dalits OF Chhattishgarh Should Learn a Lesson From The Dalits of Maharashtra
राष्ट्रीय दलित युवा मोर्चा सलाम करता हैं महाराष्ट्र के उन दलित भाइयों के आत्म-सम्मान,मानवीय गरिमा, उस संघर्ष को जों उन्होंने खैरलांजी हत्या कांड के मुजरिमों को फंसी के तख्ते तक पहुँचाया.
लेकिन एक तकलीफ भी होती हैं की ये सिलसिला केवल महाराष्ट्र तक ही सिमित रहा ,आज छात्तिश्गढ़ में लगातार दलितों के उपर अत्याचार हो रहे हैं लेकिन यहाँ के दलितों या उनके उपर कम कर रहे संघठनो के उपर जू तक नही रेंग रही , वो तमाम पार्टी के नेता जों अपने आप को दलितों का हितेषी कहते हैं या वो तमाम मानव अधिकारों की पैरवी करने वाले संघठन, दलित कार्यकर्ता ,दलित बुद्धजीवी न जाने क्यों इन मुद्दों पर चुप्पी साध लेते हैं ,ऐसे कई उदाहरण हैं की जब-जब केवल दलितों पर अत्याचार होते ये सारे लोग न जाने कहाँ गायब हो जाते हैं , लेकिन जब इनके किसी मुद्दे को लेकर रैली या धरना प्रधार्शन करना हो तो न जाने कहाँ से हमारे दलित कार्यकर्ताओं की भीड़ इनके साथ होती हैं
हम क्यों सबक नही लेते महाराष्ट्र के दलित भाइयों से सबक लेने की जिन्होंने मानवता को भी शर्मशार करने वाली खैलांजी घटना का पूरे जोर शोर से विरोध किया ,सबक लेना चाहिए उन महिलाओं से जिन्होंने मुख्यमंत्री सदन में घुसकर अपना विरोध प्रदर्शन किया,
जय-भीम
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